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Showing posts from May 8, 2020

नर सुन रे मूढ गंवारा

नर सुन रे मूढ गंवारा। राम भजन ततसारा।। टेक।। भजन बिन बैल बनेगा, शूकर श्वान शरीरं। कऊवा खर की देह धरैगा, मिटै न याह तकसीरं।। १।। कीट पतंग भवंग होत हे, गीदड जंबक जूंनी। बिना भजन जड़ बिरछ कीजिये, पद बिन काया सूंनी।। २। भक्ति बिना नर खर एक है, जिन हरि पद नहीं जान्या। पारब्रह्म की परख नहीं रे, नहीं रे, पूजि मूये पाषाना।। ३।। स्थावर जंगम में जगदीशं, व्यापक ब्रह्म बिनानी। निरालंब न्यारा नहीं दरसै, भुगतै चारों खानी।। ४ ।। तोल न मोल उजन नहीं आवै, अस्थिर आनंद रूपं। घट मठ महतत सेती न्यारा, सोहं सति सरूपं ।। ५ ।। बादल छांह ओस का पानी, तेरा यौह उनमाना। हाट पटण क्रितम सब झूठा, रिंचक सुख लिपटाना।। ६।। निराकार निरभै निरबानी,सुरति निरति निरतावै| आत्मराम अतीत पुरूष कूँ, गरीबदास यों पावै||७||

True Moksha Mantra

Supreme Saint Rampal Ji Maharaj. is the only Complete Guru in the whole of this universe at this point in time. who can impart the true mantra (initiation) to his disciples by which they can achieve salvation or Moksha. https://www.jagatgururampalji.org. जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी से निःशुल्क Online नाम दीक्षा लेने के लिए कृपया यह फॉर्म भरें ↠ निःशुल्क नाम दीक्षा फॉर्म Official Channels को सब्सक्राइब करें Youtube Satlok Ashram Sant Rampal Ji Maharaj SA News Channel 

अथ काफर बोध

अथ काफर बोध काफर बोध सुनो रे भाई, दोहूँ दीन बिच राम खुदाई।। १ काफर सो माता दे गारी, वै काफर जो खेलै सारी।। २ काफर कूड़ी साखि भरांही, काफर चोरी खट्या खांही।। ३ काफर दान यज्ञ नहीं करहीं, काफर साधु संत से अरहीं।। ४ । काफर तीरथ व्रत उठावें, सत्यवादी जन निश्चय लावें।। ५ काफर पिता बचन उलटाहीं, इतने काफर दोजिख जाहीं।। ६ सत्यकर मानों वचन हमारा, काफर जगत करूं निरबारा।। ७। वै काफर जो बड़ बोलै, काफर कहो घाटि जो तोलै।। ८ वै काफर हत्या राखै, वै काफर पर दारा ताकै।। ६ काफर स्वाल सुखन कूँ मोडै, काफर प्रीति नीच सूं जोड़े।। १० दोहा :- काफर काफर छाडि हूँ, सत्यवादी से नेह। गरीबदास जुग जुग पड़े, काफर के मुख खेहं ।। ११।। वै काफर जो कन्या मारे, वै काफर जो बन खंड जारै।। १२ वै काफर जो नारि हितांही, वै काफर जो तोरे बांही।। १३ वै काफर जो अंतर काती, वै काफर जो देवल जाती।। १४ वै काफर जो डाक बजावें वै, काफर जो शीश हलावें।। १५ ।। वै काफर जो करें कंदूरी, वै काफर जिन नहीं सबूरी ।। १६ ।। वै काफर जो बकरे खांही, वै काफर नहीं साधु जिमाहीं।। १७ ।। वै काफर जो मांस मसाली, वै काफर मारै हाली।। १८ ।। वै कफर ...
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