राजा राम लंका का राज विभिषण को देकर सीता जी अग्नि परीक्षा लेने के बाद अयोध्या आने पर घर-घर दीप जलाया। कुछ समय पश्चात रामचंद्र जी #अयोध्या की गलियों में भेष बदल कर विचरण कर रहे थे। एक घर से ऊँची-ऊँची आवाज आ रही थी। राजा रामचन्द्र जी ने निकट जाकर वार्ता सुनी। एक #धोबी की पत्नी झगड़ा करके घर से चली गई थी। वह दो-तीन दिन अपने बहन के घर रही, फिर लौट आई। धोबी उसकी पिटाई कर रहा था। कह रहा था कि निकल जा मेरे घर से, तू दो रात बाहर रहकर आई है। मैं तेरे को घर में नहीं रखूँगा।तू कलंकित है। वह कह रही थी, मुझे सौगंध भगवान की। सौगंध है राजा राम की, मैं पाक साफ हूँ। आपने मारा तो मैं गुस्से से अपनी बहन के घर गई थी, मैं निर्दोष हूँ।धोबी ने कहा कि मैं दशरथ पुत्र रामचन्द्र नहीं हूँ जो अपनी कलंकित पत्नी को घर ले आया है जो वर्षों #रावण के साथ रही थी। अयोध्या नगरी के सब लोग-लुगाई चर्चा कर रहे हैं। क्या जीना है ऐसे व्यक्ति का जिसकी पत्नी अपवित्र हो गई हो। राजा राम ने धोबी के मुख से यह बात सुनी तो कानों में मानो गर्म तेल डाल दिया हो।अगले दिन रामचन्द्र जी ने #सभा बुलाई तथा नगरी में चल रही चर्चा के विषय में ...
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